संदेश

history लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पाबूजी राठौड़ जीवनी - Biography of Pabuji Rathod in Hindi Jivani

चित्र
पाबूजी राठौड़ जीवनी - Biography of Pabuji Rathod in Hindi Jivani केसे हो सभी ! आशा करता हूं की आप सभी अच्छे है तो ठीक है हम आज के टॉपिक पर बात करते है पता है आप को की एक टाइम था की मुख से निकले वचन अपने परानो से कही ज्यादा महवपूर्ण रखते थे इसी परकार से श्री पाबूजी महाराज ने परानों का बलिदान गायों की रक्षा करते हुवे दिया था तो आज इन्ही महान पुरुष और राजस्थान के लोक देवता श्री पाबूजी राठौड़ के पूरे जीवन पर प्रकाश डालेंगे यानी की इनके इतिहास के बारे में जानेंगे श्री पाबूजी महाराज राठौड़   पाबूजी राठौड़ ( महाराज ) कि कथा : फेरां सुणी पुकार जद, धाडी धन ले जाय | आधा फेरा इण धरा , आधा सुरगां खाय || पाबूजी राठौड़ का परिचय :  नाम                 : पाबूजी राठौड़ पिता                : धांधल जी राठौड़ माता                : कमलादे जन्म स्थान       : कोलू ( फलोदी ) जन्म                : वि. स. 1313 धर्म...

Hathi Bhata Tonk History

चित्र
 Hathi Bhata Tonk History #हाथी_भाटा ....  जहां एक लाख वर्ष पहले भी जबरदस्त मानव कारीगर थे। राजस्थान के जिला टोंक में एक स्थान है हाथी भाटा ..... चौंकिएगा मत यह हाथी एक ही चटटान को काट कर निखार कर बनाया गया है ..... कोई टुकड़ा यहां वहां जोड़ा नहीं गया है ..... इसकी प्राचीनता के विषय में विवाद है लेकिन समकालीन कला के जानकार इसे न्यूनतम 1500-2000 वर्ष पुराना बताते हैं, क्योंकि इस पर हिन्दू प्रभाव ( घंटी का श्रृंगार ) स्पष्टतः देखने को मिल रहा है।   इससे भी बढ़कर बात यह है कि इस हाथी के आस-पास एक लाख वर्ष पहले भी मानव बस्ती थी और उस दौर के लोगों ने वहां चट्टानों में खोद खोद कर ( Engraving ) चित्र बनाए हुए हैं बिना किसी रंग और ब्रश के ..... फ़िर जब मनुष्य आग से भी परिचित नहीं था तब के पत्थरों के औजार भी मौजूद है ..... फ़िर 5000 वर्ष पुरानी समाधियां, आटा-मसाले आदि पीसने की चाक-घट्टी भी यहां हैं। 5000 हजार से 15000 वर्ष पहले के रंग वाले चित्र भी देखे जा सकते हैं। एक ही स्थान पर अलग-अलग कालखंड में मानव बस्तियों की उपस्थिति एक बहुत बड़ा प्रमाण है 2000 वर्ष पुराने इतिहास को समझने के ...

Indian Rajputs History 2020 Rajputo Ki Utpatti

चित्र
राजपूतों की उत्पति (rajouto ki uatpati) राजपूत वंश सूचिया| indian rajputs history Rajwada Rajput भारत में सनातन काल से ही अनेकों जातियाँ विराजमान रही हे प्राय भारत में चार वर्णो का विश्लेषण मिलता हे इन्हीं वर्णो में से एक क्षत्रियो को ही वर्तमान में राजपूत या राजपुत्र कहकर पुकारा जाता हे। राजपूतों के लिये यह कहा जाता है कि वह केवल राजकुल में ही पैदा हुआ होगा,इसलिये ही राजपूत नाम चला,लेकिन राजा के कुल मे तो कितने ही लोग और जातियां पैदा हुई है सभी को नहीं राजपूत कहा जाता है ,यह राजपूत शब्द राजकुल मे पैदा होने से नही बल्कि राजा जैसा बाना रखने और राजा जैसा धर्म  “सर्व जन हिताय,सर्व जन सुखाय”  को सर्वोपरी रखने से राजपूत शब्द की उत्पत्ति हुयी।राजपूत को तीन शब्दों में प्रयोग किया जाता है,पहला “ राजपूत ”,दूसरा “ क्षत्रिय ”और तीसरा “ ठाकुर ”,आज इन शब्दों की भ्रान्तियों के कारण यह राजपूत समाज कभी कभी बहुत ही संकट में पड जाता है। राजपूतो में कुल 62 वंशो का उल्लेख मिलता हे। राजपूत शब्द की सर्वप्रथम उत्पत्ति  6 ठी   शताब्दी   ईस्वी  में हुई थी. राजपूतों ने...

karni mata history in hindi

चित्र
karni mata story in hindi karni mata history in hindi  Shree Karni Mata Temple is a Hindu Temple Dedicated to Shree Karni Mata at Deshnoke, 30 km from Bikaner in Rajasthan, India. It is also known as the Temple of Rats.These holy rats are called Kabbas and many people travel great distances to pay their respects.  करणी माता का जन्म करणीमाता का जन्म संवत 1444 जोधपुर जिले के सुवाप नामक गांव में हुआ!!! करणीमाता के पिताजी का नाम श्री मेहाजी चारण था व माता का नाम देवलबाई था! उनका बचपन का नाम रिघुबाई था। इनका विवाह 'साठीका गाँव' के चारण बीठू केलु के पुत्र देपाजी बीठू से हुआ, किन्तु भोग-विलास से विरक्त होते हुए उन्होंने पति को समझाया और अपने पति का विवाह अपनी दूसरी बहिन गुलाब कुँवरी से करवाकर जनकल्याण, अलौकिक कार्य और चमत्कारिक शक्तियों के कारण रिघु बाई को करणी माता के नाम से स्थानीय लोग पूजने लगे। जिन्हे भक्त माँ जगदम्बा का अवतार मानते है, बताते हैं कि करनी माता 151 वर्ष जिन्दा रहकर 23 मार्च 1538 को ज्योतिर्लिन हुई थी।  Karni Mata (Riddhi Bai) was daughter of Meha ji, residing ...

Chhatrapati Shivaji Maharaj history in hindi 2020

चित्र
  Chhatrapati Shivaji Maharaj history in hindi छत्रपति शिवाजी महाराज : जीवनी , इतिहास और प्रशासन Chhatrapati Shivaji Maharaj Chhatrapati Shivaji Maharaj History in Hindi | छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास छत्रपती शिवाजी महाराज   (1630-1680 ई .)    भारत   के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने   1674   ई . में   पश्चिम भारत   में   मराठा साम्राज्य   की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष   औरंगज़ेब   के   मुगल   साम्राज्य   से संघर्ष किया। सन् 1674 में   रायगढ़   में उनका राज्यभिषेक हुआ और वह " छत्रपति " बने।छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने   समर - विद्या   में अनेक नवाचार किये तथा   छापामार युद्ध  (Gorilla War) की नयी शैली ( शिवसूत्र ) विकसित की। उन्होंने प्राचीन   हिन्दू   राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी ...